उत्तर प्रदेश में भाजपा को पटकनी देने के लिए 23 साल पुरानी दुश्मनी को भुलाकर एकसाथ आए सपा और बसपा ने चुनावी अभियान के लिए नया लोगो जारी किया है. सपा के चुनाव निशान साइकिल से सा और बसपा के चुनाव चिन्ह हाथी से थी लेकर 'साथी' बनाया है. इसके साथ ही नारा दिया है कि महागठबंधन से महापरिवर्तन. यही नहीं, सपा के साइकिल के पहिए और बसपा के हाथी सूंड को जोड़कर नया लोगो रचा है.
सपा-बसपा के नए लोगों में दोनों पार्टियों के चुनाव निशान के साथ दोनों दलों के नेताओं की तस्वीरें भी लगाई गई हैं. एक तरफ जहां, सपा की साइकिल के साथ अखिलेश यादव, मुलायम सिंह यादव और राम मनोहर लोहिया के फोटो लगे हैं. वहीं दूसरी ओर बसपा का चुनाव निशान हाथी के साथ मायावती, कांशीराम और डॉ. अंबेडकर की तस्वीर लगाई गई है.
सपा के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने ट्वीट करके इस लोगो के क्रिएटिविटी का जिक्र किया है. साथ ही उन्होंने इसे बनाने वाली टीम को बधाई दी है. इससे करीब दो घंटे पहले ही उन्होंने बसपा सुप्रीमो मायावती की भी तारीफ करते हुए उन्हें पिछड़ों, गरीबों और महिलाओं के सम्मान के लिए संघर्ष का मसीहा बताया. साथ ही उन्होंने कहा कि भाजपा समाज को पीछे ले जाना चाहती है. जबकि हम एक बेहतर भविष्य के लिए लड़ रहे हैं.
बता दें कि अखिलेश यादव और मायावती ने लोकसभा चुनाव में मिलकर नरेंद्र मोदी को हराने का फैसला किया है. सपा-बसपा उत्तर प्रदेश के साथ-साथ मध्यप्रदेश, उत्तराखंड और महाराष्ट्र में मिलकर चुनाव लड़ रहे हैं. उत्तर प्रदेश के 80 लोकसभा सीटों में से 38 सीटों पर बसपा और 37 सीटों पर सपा चुनाव लड़ रहे हैं. जबकि, 3 सीटें चौधरी अजित सिंह की पार्टी आरएलडी को दी है. इसके अलावा अमेठी व रायबरेली में कांग्रेस के खिलाफ उम्मीदवार न उतारने की घोषणा की है.
2020 में लॉन्चिंग से पहले मारुति सुजुकी अपनी इस आने वाली कार की टेस्टिंग कर कर रही है. फिलहाल इसे गुरूग्राम में टेस्टिंग के दौरान देखा गया है. Team-BHP ने टेस्टिंग के दौरान की फोटो शेयर की है. जो लीक तस्वीरें नई अल्टो की सामने आईं है उसमें ये कार SUV की तरह नजर आ रही है.
नई मारुति अल्टो की लीक तस्वीर में ये भी नजर आया है कि इसमें लार्ज रेडिएटर ग्रिल, मस्कुलर पैनल्स, कंवेंशनल हेडलैम्प यूनिट और हाई ग्राउंड क्लीयरेंस मिलेगा. इस नए डिजाइन से मारुति को पहली बार खरीदने वाले ग्राहकों को आकर्षिक करने में मदद मिलेगी. इस नए डिजाइन से नई 2020 Maruti Alto में पहले से ज्यादा स्पेस देने में भी मदद मिलेगी. खास कर इसके टॉल बॉय डिजाइन की वजह से इसमें बेहतर हेडरूम देखने को मिल सकता है.
नई मारुति अल्टो के इंटीरियर की बात करें तो इसमें नए टचस्क्रीन इंफोटेनमेंट सिस्टम ढेरों फीचर्स जैसे दिए जा सकते हैं. साथ ही इसमें कई सेफ्टी फीचर्स भी दिए जाने की पूरी उम्मीद है क्योंकि कंपनी नए सुरक्षा नियमों के हिसाब से कार को अपडेट कर उतारेगी. नए नियमों के हिसाब से अपकमिंग कार में नया बॉडी स्ट्रक्चर भी देखने को मिलेगा.
मिली जानकारी के मुताबिक, नई मारुति अल्टो में 1.0-लीटर पेट्रोल इंजन मिलेगा, जो BS-VI एमिशन नॉर्म्स वाला होगा. इसके पावर फीगर्स फिलहाल सामने नहीं आए हैं. हालांकि ये जानकारी मिली है कि ये इंजन मैनुअल और ऑटोमैटिक दोनों ही ट्रांसमिशन के साथ आएगी.
Tuesday, March 19, 2019
Tuesday, March 12, 2019
中美磋商最新进展:解决关键问题
3月12日上午7时,中共中央政治局委员、国务院副总理、中美全面经济对话中方牵头人刘鹤应约与美国贸易代表莱特希泽、财政部长姆努钦通话,双方就文本关键问题进行具体磋商,并确定了下一步工作安排。
这些天,大家对谈判进程充满各种猜测。
这个时候,这条短消息很重要。
这是第七轮高级别磋商结束以来,官方正式发布的关于谈判进展的情况。
有几个点值得注意。
首先,通话时间在上午7时。
一大清早接电话,还是个谈工作的电话。
不知道你们什么感觉,我反正早上一般睡不醒,要是碰上这事,估计得憋一肚子起床气。
更何况,这种外事通话,7点开始,准备的时间估计更早。
算了一下,这应该是华盛顿晚上七点左右,双方起早贪黑,至少说明大家都很重视。
很辛苦,不容易。
结合前两天中美各自释放的信息看,双方工作团队的沟通,一直没停。
比如,前两天路透社报道,美国农业部负责贸易和外国农业事务的副部长特德·麦金尼6日表示,美中经贸磋商正通过视频会议顺利进行。
比如,商务部副部长王受文在人大发布会上也说,“现在双方经贸团队都在夜以继日地沟通,在磋商文本”。
这是第七轮谈判后,公开报道出来的中美牵头人的首次通话。
没公开的呢?估计也有吧。
其次,提到“就文本关键问题进行具体磋商”。
这是个全新的表述。
在第七轮磋商结束的时候,当时是这么说的。
“围绕协议文本开展谈判,在技术转让、知识产权保护、非关税壁垒、服务业、农业以及汇率等方面的具体问题上取得实质性进展。在此基础上,双方将按照两国元首指示做好下一步工作。”
从“实质性进展”到“关键问题”,谈判在一步一步逼向最核心的部分。“关键问题”解决了,其他也就迎刃而解。
“关键问题”磋商得怎么样,正是最后考验双方耐心和智慧的时候。
此外,“确定了下一步工作安排”。
注意,这里的措辞也有变化。
之前提法是,“双方将按照两国元首指示做好下一步工作”。
现在则提出,“确定了下一步安排“。
可以想见,对接下来怎么谈,双方已有共识。
在这里,要提两句前些天外媒集中谈论的一个话题。
“原定于三月底的中美元首会晤被取消了”。
这个问题,也有不少朋友在后台留言问我。
怎么看?
其实,白宫国家经济委员会主任库德洛在10号接受foxnews采访时,就回答过这个问题——
“你不能取消尚未被安排的事情。”
库德洛的回答,无意中印证了一个事实。
所谓的元首会晤,完全是美方单独制造出来的舆论话题。
正如陶然笔记一直以来的看法——只有谈好了,会晤才有意义。
回头来看,今天的消息稿说,双方确定了下一步工作安排。
这表明,磋商仍在推进,而且是有计划地推进。
不过也得注意,虽然可能离结果越来越近了,但仍是工作安排。
在收获最终成果之前,不妨还是审慎乐观些好。
这些天,大家对谈判进程充满各种猜测。
这个时候,这条短消息很重要。
这是第七轮高级别磋商结束以来,官方正式发布的关于谈判进展的情况。
有几个点值得注意。
首先,通话时间在上午7时。
一大清早接电话,还是个谈工作的电话。
不知道你们什么感觉,我反正早上一般睡不醒,要是碰上这事,估计得憋一肚子起床气。
更何况,这种外事通话,7点开始,准备的时间估计更早。
算了一下,这应该是华盛顿晚上七点左右,双方起早贪黑,至少说明大家都很重视。
很辛苦,不容易。
结合前两天中美各自释放的信息看,双方工作团队的沟通,一直没停。
比如,前两天路透社报道,美国农业部负责贸易和外国农业事务的副部长特德·麦金尼6日表示,美中经贸磋商正通过视频会议顺利进行。
比如,商务部副部长王受文在人大发布会上也说,“现在双方经贸团队都在夜以继日地沟通,在磋商文本”。
这是第七轮谈判后,公开报道出来的中美牵头人的首次通话。
没公开的呢?估计也有吧。
其次,提到“就文本关键问题进行具体磋商”。
这是个全新的表述。
在第七轮磋商结束的时候,当时是这么说的。
“围绕协议文本开展谈判,在技术转让、知识产权保护、非关税壁垒、服务业、农业以及汇率等方面的具体问题上取得实质性进展。在此基础上,双方将按照两国元首指示做好下一步工作。”
从“实质性进展”到“关键问题”,谈判在一步一步逼向最核心的部分。“关键问题”解决了,其他也就迎刃而解。
“关键问题”磋商得怎么样,正是最后考验双方耐心和智慧的时候。
此外,“确定了下一步工作安排”。
注意,这里的措辞也有变化。
之前提法是,“双方将按照两国元首指示做好下一步工作”。
现在则提出,“确定了下一步安排“。
可以想见,对接下来怎么谈,双方已有共识。
在这里,要提两句前些天外媒集中谈论的一个话题。
“原定于三月底的中美元首会晤被取消了”。
这个问题,也有不少朋友在后台留言问我。
怎么看?
其实,白宫国家经济委员会主任库德洛在10号接受foxnews采访时,就回答过这个问题——
“你不能取消尚未被安排的事情。”
库德洛的回答,无意中印证了一个事实。
所谓的元首会晤,完全是美方单独制造出来的舆论话题。
正如陶然笔记一直以来的看法——只有谈好了,会晤才有意义。
回头来看,今天的消息稿说,双方确定了下一步工作安排。
这表明,磋商仍在推进,而且是有计划地推进。
不过也得注意,虽然可能离结果越来越近了,但仍是工作安排。
在收获最终成果之前,不妨还是审慎乐观些好。
Wednesday, March 6, 2019
राफेल पर 14 मार्च को अगली सुनवाई, तीखी बहस में AG ने कहा- संयम बरते सुप्रीम कोर्ट
राफेल विमान सौदे में कथित घोटाले को लेकर एक बार फिर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई. इस मामले में एक नया मोड़ आया है, बुधवार को हुई सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार की ओर से अटॉर्नी जनरल ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि जिन दस्तावेजों को अखबार ने छापा है वह रक्षा मंत्रालय से चोरी हुए थे. हम इसकी आंतरिक जांच कर रहे हैं. जस्टिस केएम जोसेफ ने सुनवाई के दौरान कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा कि अगर सबूत पुख्ता हैं और भ्रष्टाचार हुआ है तो जांच जरूर होनी चाहिए. तीखी बहस के केस की अगली सुनवाई के लिए 14 मार्च की तारीख तय की गई है.
'राजनीतिक है मामला, संयम बरते कोर्ट'
अटॉर्नी जनरल केके वेणुगोपाल ने सुप्रीम कोर्ट से कहा है कि कोर्ट के बयान का विपक्ष राजनीतिक इस्तेमाल कर सकता है. कोर्ट को इस तरह की कवायद के लिए पक्षकार क्यों बनना चाहिए. इसलिए मैं कोर्ट से अपील करता हूं कि कोर्ट को इस मामले में संयम बरतना चाहिए. उन्होंने कहा कि रक्षा खरीद की न्यायिक जांच नहीं हो सकती है.
AG की दलीलों का जवाब देते हुए वकील प्रशांत भूषण ने कहा कि मैंने पहले भी 2जी जैसे मामलों में सीबीआई चीफ रंजीत सिन्हा के घर पर एंट्री रजिस्टर जैसे कई अहम दस्तावेज व्हीसल ब्लोअर की तरह कोर्ट के सामने पेश किए और कोर्ट ने उन पर संज्ञान भी लिया था. उन्होंने कहा कि राफेल मामले में सिर्फ एक ही दस्तावेज ऐसा है जिसका स्रोत हमें मालूम नहीं है.
दूसरी तरफ याचिकाकर्ता अरुण शौरी ने कहा, 'ये हमारा दायित्व है कि कोर्ट को बताया जाए कैसे सरकार कोर्ट को गुमराह कर रही है. सब ये दस्तावेज देख चुके हैं तो AG कहते हैं कि सुप्रीम कोर्ट इन्हें नहीं देख सकता.'
सरकार ने कहा चोरी हुए राफेल के कागज
सुनवाई के दौरान AG केके वेणुगोपाल ने कहा कि जिन गोपनीय कागजों को अखबार ने छापा है उसको लेकर कार्रवाई होनी चाहिए. अटॉर्नी जनरल ने कहा कि कुछ डॉक्यूमेंट को रक्षा मंत्रालय से चोरी किया गया और आगे बढ़ाए गए. उन्होंने कहा कि ये केस काफी अहम है. अखबार ने कुछ गोपनीय जानकारी सार्वजनिक कर दी हैं. AG ने कोर्ट को बताया कि दूसरे देशों से सरकार के रिश्ते RTI के एक्ट से भी बाहर हैं, लेकिन अखबार ने सभी बातों को सार्वजनिक किया जो कि एक गुनाह है.
सुनवाई की शुरुआत में पुर्नविचार याचिका दायर करने वाले प्रशांत भूषण ने 8 पेज का नोट कोर्ट को दिखाया. हालांकि, कोर्ट की ओर से कहा गया है कि वह इस मामले में कोई नया सबूत नहीं लेंगे, जो चीज़ें उपलब्ध हैं उन्हीं पर बात होगी.
केके वेणुगोपाल ने कहा कि राफेल सौदे पर अगर न्यायिक समीक्षा होती है तो भविष्य की खरीद पर असर पड़ सकता है. उन्होंने कहा कि विदेशी कंपनियों को इस बारे में विचार करना पड़ेगा. उन्होंने समझाया कि अभी हमें संसद, मीडिया और कोर्ट की कार्रवाई को पार करना पड़ता है. उन्होंने कहा कि मीडिया की तरफ से कोर्ट को प्रभावित किया जा रहा है.
उन्होंने कहा कि 22 पायलट हर महीने राफेल उड़ाने की ट्रेनिंग लेने के लिए फ्रांस जाने वाले थे. लेकिन सारी प्रक्रिया ठप हो गई है, इससे देश को भारी नुकसान हुआ है. वेणुगोपाल ने कहा कि अखबार को उनका सोर्स बताना चाहिए और इस याचिका को रद्द करना चाहिए क्योंकि ये चोरी किए गए कागजों पर आधारित है.
'भ्रष्टाचार हुआ है तो जांच होगी'
जस्टिस केएम जोसेफ ने सुनवाई के दौरान बड़ी टिप्पणी की. उन्होंने केके वेणुगोपाल से कहा कि क्या आप कह रहे हैं कि भ्रष्टाचार की जांच सिर्फ इसलिए ना हो कि सोर्स असंवैधानिक है. हमें सबूतों की जांच करनी होगी. उन्होंने कहा कि चोरी किए गए सबूत भी महत्वपूर्ण हैं, इसकी जांच होना जरूरी है.
CJI ने पूछा क्यों नहीं की कार्रवाई?
चीफ जस्टिस रंजन गोगोई ने AG केेके वेणुगोपाल से पूछा है कि अगर आपको लगता है कि राफेल के कागज चोरी हुए हैं और अखबारों ने चोरी किए हुए कागजों पर लेख लिखे हैं तो सरकार ने कोई कार्रवाई क्यों नहीं की.
संजय सिंह को झटका
राफेल मामले में पुनर्विचार याचिका दायर करने वाले आम आदमी पार्टी के नेता संजय सिंह को सुप्रीम कोर्ट से झटका लगा है. सुनवाई के दौरान जब उनके वकील दलील देने के लिए खड़े हुए तो चीफ जस्टिस ने कहा कि हम संजय सिंह को नहीं सुनेंगे उन्होंने कुछ ऐसी टिप्पणियां की हैं जो ठीक नहीं हैं. चीफ जस्टिस ने संजय सिंह को कोर्ट की अवमानना के मामले में पेश होने को कहा है.
बीते साल 13 दिसंबर, 2018 को सुप्रीम कोर्ट ने राफेल विमान सौदे में फैसला सुनाया था और कहा था कि इस सौदे में किसी तरह की गड़बड़ी नहीं है. हालांकि, तब कुछ लोगों ने सवाल उठाया था कि केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट के सामने सही कागजात पेश नहीं किए इसलिए फैसले पर पुनर्विचार किया जाना चाहिए.
फैसला आने के फौरन बाद केंद्र सरकार ने संशोधन याचिका दाखिल की थी. इसके बाद प्रशांत भूषण ने याचिका दाखिल कर मांग की कि सरकार के दिए नोट में अदालत को गुमराह करने वाले अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की जाए. 26 फरवरी को सुप्रीम कोर्ट ने साफ कर दिया कि राफेल मामले को लेकर दिए अपने फैसले पर खुली अदालत में फिर से विचार होगा.
आपको बता दें कि वरिष्ठ वकील प्रशांत भूषण, बीजेपी के बागी नेता यशवंत सिन्हा, अरुण शौरी, आम आदमी पार्टी के सांसद संजय सिंह और वकील एम एल शर्मा ने पुनर्विचार याचिका में अदालत से राफेल आदेश की समीक्षा करने के लिए अपील की है.
अपील में कहा गया कि सरकार ने राफेल लड़ाकू विमानों की खरीद के लिए निर्णय लेने की सही प्रक्रिया का पालन नहीं किया है. मोदी सरकार ने 3 P यानी Price, Procedure, Partner के चुनाव में गफलत बनाए रखी और अनुचित लाभ लिया है.
वहीं, केंद्र सरकार की अपील में कहा गया है कि कोर्ट अपने फैसले में उस टिप्पणी में सुधार करे जिसमें CAG रिपोर्ट संसद के सामने रखने का ज़िक्र है. केंद्र का कहना है कि कोर्ट ने सरकारी नोट की गलत व्याख्या की है.
प्रशांत भूषण की एक याचिका जो सरकार द्वारा गए नोट में अदालत को गुमराह करने वाले अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई चाहती है. इसमें लिखा गया कि CAG ने राफेल पर संसद को अपनी रिपोर्ट सौंपी.
आपको बता दें कि कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी इस मुद्दे पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को घेरते रहे हैं. राहुल ने इस मुद्दे पर कई बार प्रेस कॉन्फ्रेंस की और कहा कि पीएम मोदी ने अनिल अंबानी को फायदा पहुंचाने के लिए राफेल डील में गड़बड़ी की है.
'राजनीतिक है मामला, संयम बरते कोर्ट'
अटॉर्नी जनरल केके वेणुगोपाल ने सुप्रीम कोर्ट से कहा है कि कोर्ट के बयान का विपक्ष राजनीतिक इस्तेमाल कर सकता है. कोर्ट को इस तरह की कवायद के लिए पक्षकार क्यों बनना चाहिए. इसलिए मैं कोर्ट से अपील करता हूं कि कोर्ट को इस मामले में संयम बरतना चाहिए. उन्होंने कहा कि रक्षा खरीद की न्यायिक जांच नहीं हो सकती है.
AG की दलीलों का जवाब देते हुए वकील प्रशांत भूषण ने कहा कि मैंने पहले भी 2जी जैसे मामलों में सीबीआई चीफ रंजीत सिन्हा के घर पर एंट्री रजिस्टर जैसे कई अहम दस्तावेज व्हीसल ब्लोअर की तरह कोर्ट के सामने पेश किए और कोर्ट ने उन पर संज्ञान भी लिया था. उन्होंने कहा कि राफेल मामले में सिर्फ एक ही दस्तावेज ऐसा है जिसका स्रोत हमें मालूम नहीं है.
दूसरी तरफ याचिकाकर्ता अरुण शौरी ने कहा, 'ये हमारा दायित्व है कि कोर्ट को बताया जाए कैसे सरकार कोर्ट को गुमराह कर रही है. सब ये दस्तावेज देख चुके हैं तो AG कहते हैं कि सुप्रीम कोर्ट इन्हें नहीं देख सकता.'
सरकार ने कहा चोरी हुए राफेल के कागज
सुनवाई के दौरान AG केके वेणुगोपाल ने कहा कि जिन गोपनीय कागजों को अखबार ने छापा है उसको लेकर कार्रवाई होनी चाहिए. अटॉर्नी जनरल ने कहा कि कुछ डॉक्यूमेंट को रक्षा मंत्रालय से चोरी किया गया और आगे बढ़ाए गए. उन्होंने कहा कि ये केस काफी अहम है. अखबार ने कुछ गोपनीय जानकारी सार्वजनिक कर दी हैं. AG ने कोर्ट को बताया कि दूसरे देशों से सरकार के रिश्ते RTI के एक्ट से भी बाहर हैं, लेकिन अखबार ने सभी बातों को सार्वजनिक किया जो कि एक गुनाह है.
सुनवाई की शुरुआत में पुर्नविचार याचिका दायर करने वाले प्रशांत भूषण ने 8 पेज का नोट कोर्ट को दिखाया. हालांकि, कोर्ट की ओर से कहा गया है कि वह इस मामले में कोई नया सबूत नहीं लेंगे, जो चीज़ें उपलब्ध हैं उन्हीं पर बात होगी.
केके वेणुगोपाल ने कहा कि राफेल सौदे पर अगर न्यायिक समीक्षा होती है तो भविष्य की खरीद पर असर पड़ सकता है. उन्होंने कहा कि विदेशी कंपनियों को इस बारे में विचार करना पड़ेगा. उन्होंने समझाया कि अभी हमें संसद, मीडिया और कोर्ट की कार्रवाई को पार करना पड़ता है. उन्होंने कहा कि मीडिया की तरफ से कोर्ट को प्रभावित किया जा रहा है.
उन्होंने कहा कि 22 पायलट हर महीने राफेल उड़ाने की ट्रेनिंग लेने के लिए फ्रांस जाने वाले थे. लेकिन सारी प्रक्रिया ठप हो गई है, इससे देश को भारी नुकसान हुआ है. वेणुगोपाल ने कहा कि अखबार को उनका सोर्स बताना चाहिए और इस याचिका को रद्द करना चाहिए क्योंकि ये चोरी किए गए कागजों पर आधारित है.
'भ्रष्टाचार हुआ है तो जांच होगी'
जस्टिस केएम जोसेफ ने सुनवाई के दौरान बड़ी टिप्पणी की. उन्होंने केके वेणुगोपाल से कहा कि क्या आप कह रहे हैं कि भ्रष्टाचार की जांच सिर्फ इसलिए ना हो कि सोर्स असंवैधानिक है. हमें सबूतों की जांच करनी होगी. उन्होंने कहा कि चोरी किए गए सबूत भी महत्वपूर्ण हैं, इसकी जांच होना जरूरी है.
CJI ने पूछा क्यों नहीं की कार्रवाई?
चीफ जस्टिस रंजन गोगोई ने AG केेके वेणुगोपाल से पूछा है कि अगर आपको लगता है कि राफेल के कागज चोरी हुए हैं और अखबारों ने चोरी किए हुए कागजों पर लेख लिखे हैं तो सरकार ने कोई कार्रवाई क्यों नहीं की.
संजय सिंह को झटका
राफेल मामले में पुनर्विचार याचिका दायर करने वाले आम आदमी पार्टी के नेता संजय सिंह को सुप्रीम कोर्ट से झटका लगा है. सुनवाई के दौरान जब उनके वकील दलील देने के लिए खड़े हुए तो चीफ जस्टिस ने कहा कि हम संजय सिंह को नहीं सुनेंगे उन्होंने कुछ ऐसी टिप्पणियां की हैं जो ठीक नहीं हैं. चीफ जस्टिस ने संजय सिंह को कोर्ट की अवमानना के मामले में पेश होने को कहा है.
बीते साल 13 दिसंबर, 2018 को सुप्रीम कोर्ट ने राफेल विमान सौदे में फैसला सुनाया था और कहा था कि इस सौदे में किसी तरह की गड़बड़ी नहीं है. हालांकि, तब कुछ लोगों ने सवाल उठाया था कि केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट के सामने सही कागजात पेश नहीं किए इसलिए फैसले पर पुनर्विचार किया जाना चाहिए.
फैसला आने के फौरन बाद केंद्र सरकार ने संशोधन याचिका दाखिल की थी. इसके बाद प्रशांत भूषण ने याचिका दाखिल कर मांग की कि सरकार के दिए नोट में अदालत को गुमराह करने वाले अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की जाए. 26 फरवरी को सुप्रीम कोर्ट ने साफ कर दिया कि राफेल मामले को लेकर दिए अपने फैसले पर खुली अदालत में फिर से विचार होगा.
आपको बता दें कि वरिष्ठ वकील प्रशांत भूषण, बीजेपी के बागी नेता यशवंत सिन्हा, अरुण शौरी, आम आदमी पार्टी के सांसद संजय सिंह और वकील एम एल शर्मा ने पुनर्विचार याचिका में अदालत से राफेल आदेश की समीक्षा करने के लिए अपील की है.
अपील में कहा गया कि सरकार ने राफेल लड़ाकू विमानों की खरीद के लिए निर्णय लेने की सही प्रक्रिया का पालन नहीं किया है. मोदी सरकार ने 3 P यानी Price, Procedure, Partner के चुनाव में गफलत बनाए रखी और अनुचित लाभ लिया है.
वहीं, केंद्र सरकार की अपील में कहा गया है कि कोर्ट अपने फैसले में उस टिप्पणी में सुधार करे जिसमें CAG रिपोर्ट संसद के सामने रखने का ज़िक्र है. केंद्र का कहना है कि कोर्ट ने सरकारी नोट की गलत व्याख्या की है.
प्रशांत भूषण की एक याचिका जो सरकार द्वारा गए नोट में अदालत को गुमराह करने वाले अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई चाहती है. इसमें लिखा गया कि CAG ने राफेल पर संसद को अपनी रिपोर्ट सौंपी.
आपको बता दें कि कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी इस मुद्दे पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को घेरते रहे हैं. राहुल ने इस मुद्दे पर कई बार प्रेस कॉन्फ्रेंस की और कहा कि पीएम मोदी ने अनिल अंबानी को फायदा पहुंचाने के लिए राफेल डील में गड़बड़ी की है.
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